दो पिता की कहानी । Vikramaditya Betal Stories

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Vikramaditya Betal Stories :-तांत्रिक को दिए हुए वचन को निभाने के लिए राजा विक्रमादित्य ने फिर से पेड़ पर चढ़कर बेताल को उतारकर कंधे पर डाल लिया और चलने लगे। बेताल ने उन्हें नई कहानी सुनानी शुरु कर दी।

दो पिता की कहानी

बहुत पहले अवन्तीपुर में एक ब्राह्मण रहता था। प्रसव के समय, एक सुन्दर पुत्री को जन्म देकर, ब्राम्हण की पत्ती चल बसी। ब्राम्हण अपनी पुत्री से बहुत प्यार करता था। पुत्री को प्रसन्न रखने के लिए वह उसकी हर छोटी-बड़ी इच्छा पूरी करता था। इसके लिए उसे कड़ी मेहनत करनी पड़ती थी। धीरे-धीरे ब्राम्हण की पुत्री विशाखा बड़ी होकर एक सुंदर तथा होशियार युवती बन गई।

एक दिन विशाखा सोई हुई थी, तभी एक चोर खुली खिड़की से अंदर आया और परदे के पीछे छुप गया। विशाखा उसे देखकर डर गई और पूछा, तुम कौन हो?” उसने कहा, “में चोर हूं। राजा के सिपाही मेरे पीछे पड़े हुए हैं। कुपया मेरी मदद कीजिए। मैं आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचाऊंगा।”

तभी राजा के सिपाहियों ने दरवाजे पर दस्तक दी। विशाखा ने उन्हें कुछ नहीं बताया और वे वापस चले गए। चोर बाहर निकला, विशाखा का धन्यवाद कर, जिस रास्ते आया था उसी रास्ते से चला गया।

विशाखा और उस चोर की मुलाकात अक्सर बाजार में होने लगी और धीरे-धीरे उनमें प्यार हो गया। एक चोर से विशाखा का विवाह करने के लिए उसके पिता कभी राजी नहीं होते, इसलिए दोनों ने चुपचाप विवाह कर लिया।

थोड़े दिनों तक सुखपूर्वक दिन बीत गए। एक दिन राजा के सिपाहियों ने चोर को पकड़ लिया और उसे एक अमीर के घर में डाका डालने के जुर्म में मुत्युदंड मिला। गर्भवती विशाखा विक्षिप्त होकर रोने लगी।

चोर की मृत्यु के बाद विशाखा के पिता ने समझा-बुझाकर उसका विवाह एक दूसरे व्यक्ति से कर दिया। कुछ माह के बाद उसने एक पुत्र को जन्म दिया जिसे उसके पति ने अपने बच्चे के रूप में स्वीकार किया।.

Vikramaditya Betal Stories

उनका जीवन सुखपूर्वक चल रहा था, पर दुर्भाग्यवश पांच साल के बाद विशाखा की मुत्यु हो गई। पिता ने पुत्र का लालन-पालन बहुत लाड़ प्यार से किया। पिता-पुत्र में बहुत प्रेम था। घीरे-धीरे बच्चा बड़ा होकर दयालु युवक बन गया। अचानक एक दिन उसके पिता की भी मृत्यु हो गई।

दुःखी पुत्र अपने माता-पिता की शांति की प्रार्थना करने नदी के किनारे गया। पानी में जाकर जल अंजुली में भरकर जब उसने प्रार्थना की तो तीन हाथ जल से बाहर निक्ले। एक चुडियों वाले हाथ ने कहा, “पुत्र, मैं तुम्हारी मां हूं।”

युवक ने मां को तर्पण दिया। दूसरे हाथ ने कहा, “में तुम्हारा पिता हूं।” तीसरा हाथ शांत रहा। आप कौन हैं, पूछने पर उसने कहा, “पुत्र मैं भी तुम्हारा पिता हूं। मैं ही तुम्हें लाड़-प्यार से पाल पोसकर बड़ा किया है।”

बेताल ने राजा से पूछा, “राजन। दोनों में से किस पिता के लिए पुत्र को तर्पण करना चाहिए?” विक्रमादित्य ने कहा, “जिसने उसका लालन पालन और किया । पिता के सभी कार्यों का पालन उसी ने किया है।

मां की मृत्यु के बाद यदि बच्चे का ख्याल पिा ने नहीं रखा होता, तो शायद उसकी भी मुत्यू हो जाती। वही उस युवक का पिता कहलाने का अधिकारी है।

बेताल ने ठंडी आह भरी। फिर से विक्रमादित्य ने सही उत्तर दिया था। बेताल्ल विक्रमादित्य के कंधे से उड़ा और वापस पेड़ पर चला गया।

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