ब्राह्मण और बाज । Vikram Vetaal Stories

0
Vikram Vetaal Stories
Vikram Vetaal Stories

Vikram Vetaal Stories

Vikram Vetaal Stories :-बेताल पेड़ की शाखा से प्रसन्नतापूर्वक लटका हुआ था, तभी विक्रमादित्य ने फिर वहां पहुंचकर, उसे पेड़ से उतारा और अपने कंधे पर डालकर चल दिए। बेताल ने भी अपनी अगली कहानी शुरू कर दी।

ब्राह्मण और बाज

बहुत साल पहले बनारस में धर्मस्वामी नामक एक धार्मिक ब्राह्मण रहता था। हरिस्वामी नामक उसका एक पुत्र था। वह अपनी पत्नी को बहुत प्यार करता था। उसकी पत्नी ‘सुन्दरी’ सच में बहुत सुन्दर थी। शायद ईश्वर ने फुर्सत में उसे बनाया था और अपनी सारी सुंदरता और आकर्षण उसे दे दिया था।

एक दिन चांदनी रात में जब हरिस्वामी बगीचे में अपनी पत्नी के साथ सोया हुआ था, तभी एक परी राजकुमार उधर से उड़ता जा रहा था। चांदनी से नहाई सुंदरी और भी सुंदर लग रही थी। उसे देखकर परी राजकुमार ने सोचा, “ऐसी सुंदरी यहां क्या कर रही है? इसे तो मेरे संसार में रहना चाहिए था।” ऐसा सोचकर वह सोई हुई सुंदरी को अपनी बांहों में उठाकर चला गया।

जगने पर हरिस्वामी अपनी पत्नी को नहीं पाकर परेशान हो गया। काफी देर तक उसने वहीं प्रतीक्षा की, पर वह कहां से आती। अपनी पत्नी के वियोग में वह बहुत दुःखी रहने लगा। अपना घर अपनी जायदाद सब बेचकर उसने शहर के गरीबों को भोजन कराया और शहर छोड़कर निकल पड़ा।

Vikram Vetaal Stories

एक दिन, किसी गांव से गुजरते समय उसने देखा कि एक दयालु ब्राह्मण और उसकी पत्नी गरीबों को भोजन करा रहे हैं। दुःखी हरिस्वामी भी उनके दरवाजे पर जाकर बैठ गया। ब्राह्मण की पत्नी ने उसे दुःखी और भूखा समझकर भोजन दिया। हरिस्वामी भूखा तो था ही, ब्राह्मण की पत्नी को आशीर्वाद देकर चावल का कटोरा, मक्खन, चीनी लेकर एक पेड़ के नीचे धूप में आराम करने के लिए आकर बैठ गया।

बसंत का मौसम बहुत ही सुहाना था। तभी एक बाज हरिस्वामी के सिर पर उड़ता हुआ आया। उसके मुंह में एक सांप था जिसके मुंह से जहर टपक रहा था। दुर्भाग्यवश जहर की बूंदे चावल के कटोरे में भी गिर गयीं, जिसे हरिस्वामी ने नहीं देखा। परिणामस्वरूप चावल खाते ही उसकी आंखें उलट गईं, शरीर नीला हो गया, और तुरंत ही उसकी मृत्यु हो गई।

“राजन, अब आप मुझे बताएं कि हरिस्वामी की मृत्यु का उत्तरदायी कौन था.. बाज, सांप या ब्राह्मण की पत्नी जिसने कटोरे में चावल दिए थे?” बेताल ने कहा।

राजा विक्रमादित्य मुस्कराए और बोले, “ब्राह्मण की पत्नी ने दुःखी यात्री को भोजन देकर अपना कर्म किया था। सांप बेचारा कुछ कर ही नहीं सकता था, क्योंकि वह मरा हुआ था। बाज सांप को खाना चाहता था, उसका भी कोई दोष नहीं था। यदि हरिस्वामी की मौत का उत्तरदायी किसी को ठहराना है तो वह खुद हरिस्वामी है। उसे ही अपने भोजन का ध्यान रखना चाहिए था।”

विक्रमादित्य का उत्तर समाप्त होते ही बेताल पेड़ की ओर फिर उड़कर चल दिया। उसे पता था कि राजा बुद्धिमान है और वह गलत उत्तर कभी नहीं देगा।

जरूर पढ़े:-

1.ब्राह्मण का पुत्र । Vikram Bethal Stories

2.सुनहरे आम । Tenali Raman Short Story

3.पूरा हो गया वादा । Tenali Raman Story

4.सुकुमार रानियां । Vikram Betaal Ki Kahani

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here