ईर्ष्या का फल । Vikram Betal Stories

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Vikram Betal Stories

Vikram Betal Stories :-बेताल ने विक्रमादित्य को नई कहानी सुनानी शुरू कर दी।

ईर्ष्या का फल

चित्रकूट में राजा उग्रसेन का शासन था। उनके पास एक चतुर तोता था। राजा ने तोते से पूछा, “मित्र, तुम्हारी नजर में मेरे लिए उपयुक्त वधू कौन होगी?” तोते ने उत्तर दिया, वैशाली की राजकुमारी आपके लिए उपयुक्त वधू होगी। उसका नाम माधवी है।

वह वहां की सभी कन्याओं में सबसे सुंदर है।” राजा ने तुरंत वैशाली के राजा को विवाह का प्रस्ताव भिजवाया, जिसे राजा ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। धूमधाम से दोनों का विवाह हुआ और वे सुखपूर्वक रहने लगे। राजकुमारी माधवी के पास भी मैना थी।

माधवी और उग्रसेन के विवाह के बाद वह मैना भी चित्रकूट आ गई और तोता-मैना की दोस्ती हो गई। एक दिन मैना ने तोते को एक अजीब औरत की कहानी सुनाई। किसी समय की बात है, एक धनी व्यापारी था। उसकी चंचला नामक एक पुत्री थी। चंचला सुंदर तथा बुद्धिमान होने के साथ-साथ अपने नाम के अनुरूप चंचल मन की थी।

उसके पिता ने उसके स्वभाव को बदलने की बहुत कोशिश की पर असफल रहे। उन्होंने एक सुंदर वर ढूंढकर उसका विवाह कर दिया। वह पिता का घर छोड़कर पति के घर आ गई। चचंला का पति एक व्यापारी था। व्यापार के सिलसिले में वह अधिकतर बाहर ही रहा करता था। एक दिन चचंला का हाल जानने की इच्छा से उसके पिता ने एक दूत चचंला के घर भेजा।

जब वह दूत आया, तब चचंला का पति घर में नहीं था। चचंला ने दूत का स्वागत सत्कार किया। उसे भोजन कराया। वह दूत छैल-छबीला बांका यवुक था। दोनों एक दूसरे को पसदं आ गए और उनमें प्रेम सम्बधं स्थापित हो गया। दूत को चचंला के पति से ईर्ष्या होने लगी। चचंला मन ही मन भयभीत रहने लगी कि कहीं इस सब का पता उसके पति को न चल जाए। उसने एक योजना बनाई।

Vikram Betal Stories in Hindi

चंचला ने शर्बत में जहर मिलाकर अपने प्रेमी को पिला दिया। बिना किसी शंका के उसने शर्बत पी लिया और तुरंत उसकी मृत्यु हो गई। चंचला ने उसके मृत शरीर को घसीटकर एक अंधेरे कोने में छुपा दिया। पति घर लौटा पर उसे कुछ भी आभास नहीं हुआ।

भोजन करते समय चंचला चिल्लाई, “मदद, मदद, हत्या, हत्या… अड़ोसी-पड़ोसी शोर सुनकर उसके घर इकट्ठे हो गए। उन्होंने मृत दूत को देखा और सिपाहियों को खबर कर दी। उसके पति की पेशी राजा के सामने हुई।” उस राज्य में हत्या के लिए मृत्युदंड ही मिलता था।

जब चंचला के पति को फांसी के लिए ले जाया जा रहा था तभी एक चोर वहां आया और राजा का अभिवादन कर बोला, “महाराज, मैं एक चोर हूं। जिस रात हत्या हुई, मैं चोरी के इरादे से मौके के इंतजार में अंदर छिपा बैठा था। मैंने देखा कि इस व्यक्ति की पत्नी ने शर्बत में जहर मिलाकर इसे पिलाया, जिससे इसकी तुरंत मृत्यु हो गई। कृपया आप इस निर्दोष व्यक्ति को छोड़ दें।”राजा ने निर्दोष पति को छोड़कर चंचला को मृत्युदंड दे दिया।

बेताल ने पल भर रुककर राजा से पूछा, “राजन! आपके विचार में इस दुर्भाग्य का दायित्व किस पर है?”

विक्रमादित्य ने उत्तर दिया, “चंचला के पिता ही इस दुर्भाग्य के जिम्मेदार हैं। यदि उन्होंने चंचला के पति को चंचला की आदतों के बारे में बताया होता तो वह सावधान रहता और अपनी पत्नी को ऐसे अकेले नहीं छोड़ता।”

राजा के सत्य वचन सुनकर बेताल मुस्कराया। उसने कहा, “अच्छा, मैं फिर चला..” यह कहता हुआ वह उड़कर पीपल के पेड़ पर चला गया।

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