सुकुमार रानियां । Vikram Betaal Ki Kahani

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Vikram Aur Betaal Ki Kahani
Vikram Aur Betaal Ki Kahani

Vikram Betaal Ki Kahani

Vikram Betaal Ki Kahani :-आज में आप लोगों केलिए विक्रम बेताल की एक कहानी लेके आया हूँ। ये अकबर बीरबल की तीसरी कहानी है।उम्मीद है आप लोगों को अच्छा लगेगा। अगर अच्छा लगे तोह निचे कमेंट करके जरूर बताना।

सुकुमार रानियां

बेताल पेड़ की शाखा से प्रसन्नतापूर्वक लटका हुआ था, तभी विक्रमादित्य ने फिर वहां पहुंचकर, उसे पेड़ से उतारा और अपने कंधे पर डालकर चल दिए। रास्ते में बेताल ने अपनी कहानी सुनानी शुरू की।

पुरुषपुर के राजा देवमाल्य अपनी प्रजा के बीच अपने साहस और बुद्धिमानी के लिए जाने जाते थे। उनकी तीन रानियां थीं, जिन्हें राजा बहुत प्यार करते थे। उन रानियों में एक विशेष बात थी। एक दिन की बात है, राजा देवमाल्य अपनी बड़ी रानी शुभलक्ष्मी के साथ बगीचे में टहल रहे थे।

तभी एक नरम गुलाबी फूल पेड़ से टपका और रानी के हाथों को छूता हुआ गिर पड़ा। रानी की चीख निकली और वह बेहोश हो गई। रानी इतनी सुकुमार थी कि फूल ने उसके हाथों को घायल कर दिया था। राजा ने तुरंत शहर के अच्छे वैद्यों को बुलवाया। रानी का इलाज शुरू हुआ और वैद्यों ने वुछ दिन आराम करने की सलाह दी।

उसी रात राजा अपने महल की बालकनी में अपनी दूसरी पत्नी चन्द्रावती के साथ आराम से बैठे थे। चांदनी रात थी। ठंडी हवा के झोंके, बगीचे के फूलों की खुशबू लिए आ रहे थे। वातावरण बहुत मादक हो रहा था। तभी चन्द्रावती चीखने लगी, “मैं यह चांदनी बर्दाश्त नहीं कर सकती। यह मुझे जला रही है।”

Vikram Betaal Ki Kahani

परेशान राजा ने तुरंत उठकर सारे परदों को गिरा दिया, जिससे चांदनी अंदर नहीं आ सके। वैद्य बुलाए गए। उन्होंने पूरे शरीर पर चंदन का तेल लगाया और आराम करने की सलाह दी। एक दिन राजा की इच्छा अपनी तीसरी पत्नी मृणालिनी से मिलने की हुई।

मृणालिनी तीनों में सबसे सुंदर रानी थी। राजा के निमंत्रण पर वह राजा के कमरे की ओर जा रही थी कि अचानक ही वह चीखकर बेहोश हो गई। आनन-फानन में चिकित्सक बुलवाए गए। उन्होंने देखा कि उसके दोनों हाथ फफोलों से भर गए हैं।

होश में आने पर रानी ने बताया कि आते समय उसने रसोईघर से आती चावल कूटने की आवाज सुनी थी। वह आवाज असहनीय थी। बेताल ने पूछा, “ राजन अब आप बताइए कि तीनों रानियों में सबसे संवेदनशील और सुकुमार कौन सी रानी थी? ”

विक्रमादित्य ने धीरे से कहा, “ तीसरी रानी… यों तो तीनों रानियां सुकुमार थीं, पर शुभलक्ष्मी और चंद्रावती को तो फूल और चांद की चांदनी ने स्पर्श किया था, जबकि मृणालिनी तो सिर्फ चावल कुटने के आवाज से घायल हो गई थी।

इसलिए सबमें वही सबसे अधिक संवेदनशील थी। ” “आप सही हैं राजन ”, यह कहता हुआ बेताल उड़कर वापस पेड़ पर चला गया।

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