चार राजकुमार । Vikram Aur Betaal Stories

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Vikram Aur Betaal Stories :-दोस्तों आज की कहानी चार राजकुमार के बारेमे है। ये कहानी विक्रम और बेताल की दूसरी कहानी है। इसी तरह कहानी पढ़ने केलिए हमारे साथ जुड़े रहिये। उम्मीद करता हूँ आप लोगों को अच्छा लगेगा।

चार राजकुमार

बहुत पुरानी बात है, मिथिला में उदयदित्य नामक एक बुद्धिमान राजा थे। वे अपनी प्रजा को बहुत प्रिय थे। उनकी प्रजा उन्हें उनकी दयालुता, समानता तथा न्यायप्रियता के लिए बहुत पसंद करती थी।

राजा की रूपमंजरी नामक एक पुत्री थी, जो बहुत ही बुद्धिमान तथा सुंदर थी। रूपमंजरी को जो भी देखता था, बस देखता ही रह जाता था। जब वह विवाह के योग्य हुई तो उसके लिए ढेरों रिश्ते आने लगे। राजा और रानी के लिए योग्य वर का चुनाव करने की समस्या खड़ी हो गई।

एक दिन उदयदित्य अपने सजे हुए दरबार में बैठे थे, तभी एक सुंदर राजकुमार वहां आया। आदरपूर्वक अभिवादन कर वह बोला, “मैं कलिंग का राजकुमार हूं और राजकुमारी से विवाह की इच्छा लेकर आया हूं।”

राजा ने कहा, “मैं तुम्हारी इच्छा का सम्मान करता हूं। कलिंग हमारा पड़ोसी और मित्र राज्य है। तुमसे राजकुमारी का विवाह करने से हमारे संबंध और भी गहरे बन जाएंगे। तुम राजवंश के भी हो परंतु तुममे ऐसी कौन सी विशेषता है,जो तुम्हें दूसरों से अलग करती है?”

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राजकुमार बोला, “महाराज! मैं एक योद्धा हूं और बहुत अच्छे गुरुओं के द्वारा युद्धविद्दा में पारंगत हूं। मैं अपने देश की सेना का सेनापति हूं और कई युद्ध भी जीत चुका हूं।” राजकुमार की बात सुनकर राजा ने प्रसन्न होकर राजकुमार को अपने महल में राजकीय अतिथि के रूप में राजकुमारी का निर्णय आने तक रुकने के लिए कहा।

अगले दिन राजसभा में दूसरा राजकुमार उपस्थित हुआ और राजकुमारी के साथ विवाह करने की इच्छा से बोला, “महाराज, मैं जनकपुर का राजकुमार हूं। मैंने बहुत सारी धार्मिक पुस्तकें पढ़ी हैं और काफी समय से जीवन का सत्य ढूंढ रहा हूं

ज्ञान की अपूर्व चाह ही मुझे सबसे अनुपम बनाती है।” राजा राजकुमार से बहुत प्रभावित हुआ और उससे अपने महल के अतिथिगृह में कुछ दिन ठहरने के लिए कहा।

तीसरे दिन वैशाली का राजकुमार दरबार में उपस्थित हुआ और रूपमंजरी से विवाह की इच्छा से बोला, “महाराज, मुझे प्रकृति मां का आशीर्वाद प्राप्त है। मैं पशु-पक्षियों की भाषा को समझ सकता हूं।” राजा ने उसके गुण की प्रशंसा करते हुए उसे भी महल के अतिथिगृह में राजकुमारी के निर्णय तक रूकने के लिए कहा।

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चौथे दिन मालव्य का राजकुमार आया। उसने भी राजकुमारी से विवाह की इच्छा बताते हुए कहा, “महाराज, मैं बहुत ही धनी राज्य का राजकुमार हूं। मेरा मानना है कि धन से ही प्रगति होती है। मैं एक व्यापारी हूं और धन से धन कमा सकता हूं।”

चारों राजकुमारों का विवरण सुनकर राजा और रानी अनिर्णय की स्थिति में आ गए। उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वे किसे अपनी पुत्री के योग्य वर चुनें। उन्होंने अंत में निर्णय राजकुमारी पर ही छोड़ दिया। इतना कहकर बेताल रुक गया और राजा से पूछा, “राजन!

आप ही बताइए राजकुमारी को किसे चुनना चाहिए? उसकी बुद्धिमानी और सुंदरता के हिसाब से कौन सबसे अधिक योग्य वर है?” विक्रमादित्य ने तुरंत उत्तर दिया, “यदि राजकुमारी सच में बुद्धिमान है तो वह कलिंग के राजकुमार को चुनेगी। जनकपुर का राजकुमार विद्वान तो है, पर अच्छा शासक नहीं बन सकता है।

वैशाली के राजकुमार पर प्रकृति मां की कृपा है, वह पशु-पक्षी की भाषा समझ सकता है, पर युद्ध की स्थिति में उसका यह गुण किस काम का? मालव्य का राजकुमार एक अच्छा व्यापारी तो है, पर राजा बनने के लायक नहीं है। यदि राजकुमारी समझदार है तो वह अपने लोगों के भले को देखते हुए कलिंग के राजकुमार को ही चुनेगी।”

“तुम सही हो राजन!” ऐसा कहकर हंसता हुआ बेताल उड़कर वापस पीपल के पेड़ पर चढ़ गया।

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