पूरा हो गया वादा । Tenali Raman Story

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Tenali Raman Story
Tenali Raman Story

Tenali Raman Story

Tenali Raman Story :- Friends आज में आप लोगों केलिए तेनाली रमन की एक कहानी लेके आया हूँ। ये अकबर बीरबल की तीसरी कहानी है।उम्मीद है आप लोगों को अच्छा लगेगा। अगर अच्छा लगे तोह निचे कमेंट करके जरूर बताना।

पूरा हो गया वादा

एक बार कृष्ण देव राय अपने प्रिय दरबारी तेनाली रमन के साथ राज्य के आसपास के गांवों के दौरे पर निकले। वे अक्सर अपनी प्रजा का सुख-दुख जानने के लिए ऐसा किया करते थे।

एक दिन महाराज ने एक किसान को खेत में काम करते हुए देखा। उन्होंने तेनाली से कहा कि वह जा कर किसान से बात करके आए। तेनाली किसान से बात करके आए और कहा, “महाराज, उस किसान के पास खेत का छोटा सा टुकड़ा है।

वह नियमित रूप से अपना लगान देता है। वह एक माह में चालीस वराह (सिक्के) कमाता है और उन्हें बहुत सोच-समझ कर खर्च करता है ताकि वह अपने बड़े से परिवार का पेट भर सके।”

“वह चालीस वराह कहां-कहां खर्च करता है।” महाराज ने पूछा। “वह दस वराह अपने ऊपर व्य करता है। दस वराह से आभार प्रकट करता है। दस वापसी देता है और दस वराह ब्याज पर देता है, महाराज।” “तेनाली बोले। “यह कैसे संभव हो पाता है?”

‘महाराज! वह दस वराह अपने ऊपर व्यय करता है। पत्नी के लिए आभार प्रकट करते हुए दस वराह उसे देता है। वह अपने माता पिता पर जो व्यय करता है, वह उस धन की वापसी है जो उन्होंने उस पर खर्च किया है और वह आश करता है कि वह अपने बच्चों पर जो खर्च कर रहा है, वह उसे ब्याज सहित वापिस मिलेगा।” तेनाली बोले।

Tenali Raman Story in Hindi

“वाह, तुमने तो इस पहेली को बहुत ही खूबसूरती से हल कर दिया है। तेनाली रमन, मैं यही प्रश्न अपने बाकी दरबारियों से पूछने जा रहा हूं। देखें कि वे सही जवाब दे पाते हैं या नहीं। तुम्हें हुक्म देता हू कि तुम किसी को जवाब मत बताना। जब तक तुम मेरा मुंह सौ बार न देख लो। इसका उत्तर किसी से मत कहना।”

‘जैसा आप चाहें महाराज।” तेनाली रमन ने कहा। हालांकि वे मन ही मन जानते थे कि इस पहेली को हल करना बच्चों का खेल नहीं था। महाराज कृष्ण देव राय के दरबार में बैठे अष्टदिगज भले ही कितनी भी डींगें क्यों न हांक लें, जब भी अपनी बुदुधिमत्ता दिखाने की बारी आती तो वे बगले झांकने लगते।

वे कभी महाराज की बातों का सही उत्तर नहीं दे पाते थे। तेनाली को ही आगे आ कर सारा मामला संभालना पड़ता। इस बार तो बात ही अलग थी। तेनाली को पहेली का जवाब नहीं देना था, उन्हें तो विशेष रूप से चुप रहने को कहा गया था ताकि दूस दरबारियों की परख की जा सके।

महाराज ने अपने अष्दिगजों से चालीस वराह वाली पहेली के बारे में पूछा। वे सभी एक दूसरे के मुंह देखने लगे। जब कोई उत्तर नहीं दे सका तो एक दिग्गज पेदन्ना ने कहा, “अगर आप एक दिन का समय दें तो मैं कल इसका उत्तर दे दूंगा।”

महाराज ने हामी भर दी। पेदन्ना जानते थे कि तेनाली को अवश्य उत्तर पता होगा। वे शाम को ही तेनाली के घर जा पहुंचे। उन्होंने तेनाली को जा कर बताया कि वे महाराज से पहेली का हल बताने के लिए एक दिन का समय मांग चुके हैं और अगर उन्होंने जवाब न दिया तो उनका बहुत अपमान होगा।

Tenali Raman Kahaniya

पहले तो तेनाली नहीं माने। उन्हें याद था कि महाराज ने मना किया है। अंत में पेदन्ना ने सौ वराह की एक थैली उनके हाथों में रख दी। तेनाली को एक मस्ती सुझी। उन्होंने सौ वराह से भरी थैली रखी और उत्तर बता दिया। अब वे अगले दिन दरबार लगने की प्रतीक्षा करने लगे। उस दिन पहेली का राज जो खुलने वाला था।

अगले दिन दरबार में सही उत्तर पा कर महाराज हैरान रह गए। वे समझ गए कि हो न हो तेनाली ने ही उत्तर बताया होगा। ‘रमन यह उत्तर तुमने ही बताया है न? मैंने कहा था न कि जब तक तुम सौ बार मेरा मुंह न देख लो। तब तक तुम मुंह मत खोलना।” महाराज बोले।

तेनाली ने सौ वराह वाली थैली महाराज को दिखाते हुए कहा “महाराज मैने इनके दिए हुए सौ सिक्कों पर आपका चेहरा देखा और फिर शर्त पूरी होने पर इन्हें पहेली का हल बता दिया।”
महाराज तेनाली की शरारत भरी बात सुन कर हंसने लगे।

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