सबसे बड़ा मूर्ख । Tenali Raman Story in Hindi

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Tenali Raman Story in Hindi
Tenali Raman Story in Hindi

Tenali Raman Story in Hindi

Tenali Raman Story in Hindi :-Friends आज में आप लोगों केलिए तेनाली रमन की एक कहानी लेके आया हूँ। ये तेनाली रमन की चौथा कहानी है। उम्मीद है आप लोगों को पसंद आएगा। अगर अच्छा लगे तो निचे कमेंट करके जरूर बताना।

सबसे बड़ा मूर्ख

विजय नगर के राजा कृष्णदेव राय को घोड़ों का बहुत शौक था। एक दिन एक अरबी घोड़ों का व्यापारी राजा के पास पहुंचा और कहा, “महाराज, मैं अपने देश से कुछ घोड़े लाया हूं। क्या आप उन्हें खरीदना चाहेंगे?” राजा को एक तगड़ा घोड़ा दिखा, जो खुद व्यापारी का था।

राजा ने जानना चाहा कि व्यापारी के पास किस तरह के घोड़े हैं। व्यापारी ने कहा, “महाराज, मैं बीस घोड़ों को बेचने के लिए लाया हूं। उनमें से सबसे अच्छी नस्ल और मजबूत कदकाठी वाला आपके सामने है।

सिर्फ एक नमूने के रूप में मैं लाया हूं, क्योंकि सभी बीस घोड़ों को विजयनगर लाना मुश्किल था। अगर आपको यह पसंद है, तो मैं सभी बीस घोड़े आपको पांच हजार सोने के सिक्कों में बेच सकता हूं।” राजा बहुत खुश हुए।

वास्तव में उन्हें वह घोड़ा पसंद आ गया था। उन्होंने सोचा, “क्या अद्भुत दृश्य होगा, जब बीस के बीस घोड़े मेरे पास होगें। मेरा अस्तबल पूरे देश में सबसे अच्छा अस्तबल हो जाएगा।” इसलिए वह व्यापारी के प्रस्ताव पर सहमत हो गए। लेकिन व्यापारी ने कहा, “एक बात है, मैं चाहूंगा कि आप मुझे सारी राशि अभी दे दें।

मैं उस पैसे के बदले में बाकी के बीस घोड़े जल्दी ही लेकर आ जाऊंगा, यह मेरा वादा है।” हालांकि राजा इस बात के लिए राजी नहीं थे, लेकिन उन्होंने उस आदमी को पूरी राशि पहले दे दी। व्यापारी ने वह राशि ली और चलता बना।

Tenali Raman Story in Hindi

उसके बाद बहुत महीने बीत गए और अरबी व्यापारी का कोई भी अता-पता नहीं चला। राजा अधीर हो गए। एक दिन जब वह अपने महल के चारों ओर घूमते हुए बगीचे में टहल रहे थे, तब उनहोंने देखा कि तेनालीराम एक कागज के टुकड़े पर कुछ लिख रहा है।

राजा ने पूछा, “आप क्या लिख रहे हैं?” तेनालीराम ने कहा, “महाराज, मैं अपने नगर के मूर्खों की एक सूची बना रहा हूं।” राजा ने कहा, “मुझे भी दिखाओ।” तेनालीराम ने उत्तर दिया, “मैं क्षमा चाहता हूं महाराज, मैं इसे आपको नहीं दिखा सकता हूं।” राजा ने पूछा, “क्यों?” तेनाली चुप ही रहा। राजा ने कागज उसके हाथ से छीन लिया। वह सूची पढ़ते ही चैंक गये और क्रोध में आकर चिल्लाए,

“तेनालीराम, तुम्हारी इतनी हिम्मत? अपने राजा के नाम को इस सूची में सबसे ऊपर दिखाने की तुमने हिम्मत कैसे की?” तेनालीराम ने शांति से जवाब देते हुए कहा, “क्योंकि महाराज, एक अजनबी को पांच हजार सोने के सिक्के देकर उसके वापिस आने की आशा करने वाला महामूर्ख ही माना जाएगा।”

राजा ने कहा, “तुम यह कैसे सुनिश्चित कर सकते हो कि वह वापस नहीं आएगा? और अगर वह वापस आएगा, तो?” तेनालीराम ने कहा, “तो महाराज, मैं आपका नाम सूची से निकाल दूंगा और उसका नाम लिख दूंगा।” राजा ने तेनालीराम से आगे प्रश्न नहीं किया। उन्होने सूची को वापिस तेनालीराम को सौंप दिया और बगीचे से दूर चले गये।

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