कहां है खजाना । Tenali Raman Stories

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Tenali Raman Stories :-हेलो मित्रों आज की कहानी चोर और खजाना के बारेमे है। ये कहानी तेनाली रमन की दूसरी कहानी है। इसी तरह कहानी पढ़ने केलिए हमारे साथ जुड़े रहिये। उम्मीद करता हूँ आप लोगों को अच्छा लगेगा। ये कहानी केसा लगा कमेंट करके जरूर बताना।

कहां है खजाना?

तेनाली रमन के घर में बहुत बड़ा बगीचा था। पिछले दिनों वे राजकाज में इतना उलझे रहे कि उन्हें अपने पौधों को पानी देने का समय भी नहीं मिल रहा था। एक दिन वे काम से लौटे तो उन्होंने कुछ अनजान लोगों को अपने बाग की झाडियों में छिपते हुए देखा। वे समझ गये थे कि वे चोर हैं। इसलिए उन्हें जल्दी ही कोई उपाय खोजना था।

उन्होंने झट से अपनी पत्नी को पुकारा, “सुनती हो, हमारे राज्य में आजकल बहुत चोर हो गए हैं। हमें अपने घर का बहुमूल्य सामान और जेवर कहीं छिपा देने चाहिए। मैं एक बड़ा सा संदूक ला रहा हूँ। तुम जरा मेरी मदद करो।”

तेनाली की पत्नी को कुछ समझ नहीं आया। लेकिन उसे इतना अवश्य पता था कि उसके पति के हर काम का कोई न कोई मतलब अवश्य होता है। तेनाली ने झट से अपनी पत्नी को सारी बात बताई व अपनी योजना भी समझा दी। वह मुस्कुराई और आगे की योजना पर काम करने लगी। तेनाली ने एक बड़ा सा खाली संदूक लिया। उनकी पत्नी ने पिछले बरामदे से कुछ छोटे पत्थर चुने और उसमें डाल दिए। तेनाली ने उसमें कुछ बड़े-बड़े पत्थर डाल दिए ताकि संदूक कुछ भारी हो जाये।

चोरों ने तेनाली और उनकी पत्नी की सारी बात सुन ली थी। दरअसल तेनाली ने जान कर वह बात जोर से कही थी ताकि वे सुन सकें। जैसे ही शाम होने लगी, तो तेनाली अपनी पत्नी के साथ एक बड़ा सा संदूक घसीटते हुए बाहर आए। वे उसे कुएं तक लाए और कुएं की मुंडेर पर रख कर, पानी में धक्का दे दिया। जोर से छपाक का स्वर सुनाई दिया और इसके बाद शांति छा गई।

Tenali Raman Stories

तेनाली रमन और उनकी पत्नी ने घर के दरवाजे और खिडकियां अच्छी तरह बंद किए और सोने चले गए। रात हो गई, कुछ समय बाद, चोर अपने छिपने के स्थान से बाहर आए, वे कुएं के पास गए। जब उन्होंने भीतर झांका तो उन्हें पानी में पड़ा संदूक दिखाई दिया। ‘इसे बाहर कैसे निकालेंगे?”

“बाहर नहीं निकाल सकते, पहले हमें कुआं खाली करना होगा।” उनमें से एक ने कहा।
“यह तो अच्छा उपाय रहेगा। चलो, जल्दी से कुंआ खाली करें” दूसरे चोर ने कहा।

 

वे कुएं से पानी निकाल कर, बगीचे में फेंकने लगे। कुएं में पानी का स्तर नीचे आ गया। जल्दी ही संदूक दिखाई देने लगा। उनमें से एक कुएं में नीचे उतरा और उसने संदूक को रस्सियों से बांध दिया। फिर उन सबने बड़ी मुश्किल से संदूक को कुंए से बाहर निकाला।

जब संदूक को खोला गया, तो ये क्या। उसमें तो छोटे-बड़े पत्थर भरे हुए थे। चोरों को काटो तो खून नहीं। लगभग सुबह होने वाली थी। तेनाली अपने घर की खिड़की से सारा तमाशा देख रहे थे। वे टहलते हुए बाहर आए तो चोर सकपका गए।

“कैसे हैं, आप भलेमानस। आज की सुबह कितनी सुंदर है न? मेरे पौधों को पानी देने के लिए आप सबकी बहुत-बहुत मेहरबानी।” चोरों ने तेनाली से माफी मांगी और वहां से चले गए। भला कोई तेनाली को भी मूर्ख बना सकता है।

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