खो गए सिक्के । Tenali Raman Stories In Hindi

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Tenali Raman Stories In Hindi

Tenali Raman Stories In Hindi :-दोस्तों आज की कहानी एक व्यापारी के बारेमे है। ये कहानी तेनाली रमन की पहला कहानी है। इसी तरह कहानी पढ़ने केलिए हमारे साथ जुड़े रहिये। उम्मीद करता हूँ आप लोगों को अच्छा लगेगा। ये कहानी केसा लगा कमेंट करके जरूर बताना।

खो गए सिक्के

एक बार बाजार में बहुत शोर मचा हुआ था। एक व्यापारी सड़क के बीच खड़ा हो कर चिल्ला रहा था।
“मेरा बटुआ खो गया। मेरा बटुआ कहीं गिर गया। उसमें बहुत सारे सिक्के थे। कोई मेरा बदुआ खोज दो। जो मुझे मेरा धन ला कर देगा। मैं उसे इनाम दूंगा।”

एक गरीब भिखारी सड़क के किनारे बैठा था। अचानक उसकी नजर पेड़ के पास गिरी थैली पर गई। उसने उसे उठाया तो पाया कि उसमें सौ वराह थे। वह एक ईमानदार आदमी था। उसने थैली को व्यापारी को लेजा कर दिखाया और पूछा, “श्रीमान। क्या आप इसे ही खोज रहे हैं?”

व्यापारी ने उसके हाथ से थैली छीन ली और बोला, “हां, यह तो मेरा ही है।
“अच्छी बात है। अब तो आपको मेरा इनाम देना चाहिए।” भिखारी बोला।

“इनाम? कैसा इनाम? इस थैली में दो सौ वराह थे। अब तुम वापिस दे रहे हो तो केवल सौ वराह ही हैं। तुमने तो पहले ही सौ वराह थैली में से निकाल लिए। अब कौन सा इनाम चाहिए?” लालची और बेईमान व्यापारी ने कहा।

भिखारी को बहुत गुस्सा आया और दिल को कष्ट भी हुआ। वह बेईमान नहीं था। बहस लगातार चलती रही और आसपास के लोग भीड़ बना कर खड़े हो गए। अंत में भिखारी बोला, “हम महाराज के दरबार में जाएंगे ताकि इस बात का फैसला हो सके कि सच और झुठ क्या है।”

Tenali Raman Stories In Hindi

महाराज ने उनकी बात सुनी तो तेनाली रमन को निर्देश दिए कि वे उनके मामले को सुलझा दें। तेनाली रमन बोले, “तुम दोनों ही ठीक कह रहे हो। व्यापारी का कहना है कि जब उसका बटूआ खोया तो उसमें दो सौ वराह थे। तुम्हें एक बटूआ मिला, जिसमें सौ वराह थे, ठीक है यही बात है।”

“जी, श्रीमान्” दोनों ने एक साथ कहा। तेनाली ने भिखारी से कहा, “फिर तो दोनों ही बातें सच हैं। अब इस बटूए में सौ वराह हैं। यह वह बटूआ नहीं हो सकता, जो व्यापारी का था। यहां कोई भी सौ वराह वाले बटुए का दावा नहीं करने आया। इसका मतलब होगा कि जिसे मिला है, यह उसी का कहलाएगा। इस तरह यह खोया हुआ बटूआ तुम्हारा है।”

यह कह कर तेनाली ने भिखारी के हाथ में थैली थमा दी। भिखारी ने बहुत ही स्नेह से थैली थामी और तेनाली व महाराज के आगे सिर झुकाया। लालची व्यापारी दंग खड़ा रह गया क्योंकि उसने तो अपने सौ वराह भी खो दिए थे।

वह इस न्याय के खिलाफ कुछ नहीं बोल सकता था क्योंकि उसने ही तो कहा था कि उसकी थैली में दो सौ वराह थे। अब वह किस मुंह से अपने न्याय के लिए गुहार लगाता। वह अपना सा मुंह ले कर लौट गया। महाराज तेनाली रमन का न्याय देख हंसने लगे। तेनाली ने दुष्ट व्यापारी को अच्छा सबक सिखा दिया था।

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