सुनहरे आम । Tenali Raman Short Story

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Tenali Raman Short Story
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Tenali Raman Short Story

Tenali Raman Short Story :-दोस्तों आज में आप लोगों केलिए तेनाली रमन की एक कहानी लेके आया हूँ। ये तेनाली रमन की पांचवा कहानी है। उम्मीद है आप लोगों को पसंद आएगा। अगर अच्छा लगे तो निचे कमेंट करके जरूर बताना।

सुनहरे आम

राजा कृष्णदेव राय की मां बहुत ही धार्मिक विचारों की महिला थीं। राजा को अपनी मां से बहुत स्नेह था।

अपने जीवनकाल में उन्होंने बहुत सारा दान-पुण्य और तीर्थयात्राएं की थीं। उनके बीमार होने पर राजा ने शहर के सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक बुलवाये पर वे उन्हें स्वस्थ नहीं कर सके। मां का शरीर बुढ़ा होने के कारण साथ नहीं दे रहा था।

बीमारी की हालत में भी राजा की मां ने राजा से आम खाने की इच्छा प्रकट की। राजा ने आम मंगवाया, पर आम आने से पहले ही मां ने हमेशा के लिए अपनी आंखें बंद कर लीं। मां की अंतिम इच्छा पूरी न कर पाने का दुःख राजा को सताने लगा राजा बहुत उदास हो गए।

अंतिम क्रिया कर्म करने आए ब्राम्हण को राजा की उदासी का कारण पता चला, तो उन्होंने राजा से धन प्राप्ति की इच्छा से कहा, “महाराज, आपकी मां की अंतिम इच्छा आम खाने की थी, जो पुरी नहीं हो पाई। उनकी आत्मा की शांति के लिए यदि कुछ सुनहरे आम ब्राह्याणों को दान दिए जाएं तो अच्छा होगा।”

ब्राम्हणों की आम दान की बात राजा को अच्छी लगी। उन्होंने ठोस सोने के दस आम बनवाए और ब्राम्हणों को दान कर दिए। ब्राम्हणों ने राजा से पूजा करवाई, दान लिया और खुशी-खुशी घर चले गए। वे राजा को ठगने में सफल हो गए थे।

Tenali Raman Short Story

तेनालीराम ने यह सब देखा तो उसे ब्राम्हणों का तर्क जरा भी समझ नहीं आया। उसने सोचा कि भल्ला ब्राम्हण के हाथ का आम मुतात्मा को कैसे संतुष्ट कर सकता है? यह जरूर ही ब्राम्हणों की, राजा को ठगने की चाल है। मन ही मन तेनालीराम ने ब्राम्हणों को पाठ पढ़ाने का सोचा।

कुछ दिनों बाद तेनालीराम ने ब्राम्हणों को अपने घर पर आमंत्रित किया और उनसे कहा, “कुछ समय पहले मेरी मां की मुत्य हो गई थी। में उनकी अंतिम इच्छा पूरी नहीं कर पाया था। उनकी इच्छा थी कि मैं उन्हें लोहे के गरम सरिया से मरूँ। मैं ऐसा कर नहीं पाया।

अपने दिल में अधूरी इच्छा लिए हुए वह चली गयी और उनकी आत्मा अभी तक असन्तुष्ट घूम रही है। राजा की मां की आत्मा की शांति के लिए जैसे आपने सुनहरे आम दान की बात की थी, उसी तरह मेरी मां की आत्मा की शांति भी आप ही को करनी है। में अपनी मां के लिए लाल गर्म लोहे की सरिया से आप लोगों को मरूँगा, जिससे उनकी आत्मा को शांति मिल जाएगी।”

सामने ही तेनालीराम का सेवक लाल गर्म सरिया लेकर खड़ा था। डर के मारे सारे ब्राम्हण कांपने लगे। सब के सब तेनालीराम के पैरों पर गिरकर क्षमा याचना करने लगे। तेनालीराम ने राजा के आम लौटाने तथा राजा से क्षमा याचना करने के लिए कहा।

अगले दिन राजा को उनके दान में दिए सुनहरे आम वापस मिल्ल गए, क्योंकि ब्राह्यणों को उनके किए का फल मिल चुका था।

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