भक्ति की बात । Story of Akbar And Birbal

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Story of Akbar And Birbal
Story of Akbar And Birbal

Story of Akbar And Birbal

Story of Akbar And Birbal :-दोस्तों आज में आप लोगों केलिए अकबर बीरबल की एक कहानी लेके आया हूँ। ये अकबर बीरबल की सातवा कहानी है। उम्मीद है आप लोगों को पसंद आएगा। अगर अच्छा लगे तो निचे कमेंट करके जरूर बताना।

भक्ति की बात

बादशाह अकबर को अनेक कलाओं से प्रेम था, परंतु उन्हें संगीत का ज्यादा शौक था। उनको दरबार के नौ रत्नों में से एक तानसेन थे, जो अपने संगीत की वजह से सम्मान से जाने जाते थे।

एक बार अकबर तानसेन के संगीत से बहुत खुश हुए और उन्होंने तानसेन से कहा, “तुम दुनिया के सबसे अच्छे कलाकार हो। तुम्हारा संगीत बहुत महान है, जिसकी किसी से तुलना नहीं की जा सकती।”

तानसेन आभार के साथ अभिभूत थे, किंतु वह एक समान्य व्यक्ति थे। उन्होंने कहा, “यह केवल आपकी राय है। दुनिया में बहुत से कलाकार मुझसे बेहतर हैं।”

अकबर ने कहा, “तानसेन मैंने बहुत संगीतकारों को सुना है। किंतु तुम्हारा संगीत उन सबसे बहुत अच्छा है।” तानसेन ने कहा, “मेरे मालिक ! फिर तो आपको मेरे गुरु स्वामी हरिदास को जरूर सुनना चाहिए। वह मुझसे बहुत अच्छा गाते हैं।”

अकबर ने बहुत उत्सुकता से कहा, “यदि ऐसा है तो मैं तुम्हारे गुरु का संगीत जरूर सुनूंगा। तुम्हें उनसे मेरे लिए संगीत गाने का अनुरोध करना होगा।”

Story of Akbar And Birbal

तानसेन ने कहा, “मेरे मालिक! स्वामी हरिदास कभी दरबार में नहीं आते है और न ही वह आपके लिए गायेंगे। किंतु यदि आप मेरे साथ उनके घर जाएंगे, तो आप उनका संगीत सुन सकते हैं।” अकबर, बीरबल तानसेन के साथ स्वामी हरिदास के घर जाने को राजी हो गए।

अकबर स्वामी हरिदास के घर कुछ दिनों तक रुके किंतु गुरु ने उस बीच में कुछ भी नहीं गाया। अकबर अधीर हो रहे थे।

उन्होंने तानसेन को बुलाया और कहा, “स्वामी हरिदास कब गायेंगे? मैं यहां चार दिन से हूं किंतु अब तक उन्होंने संगीत का एक शब्द तक नहीं गाया। लगता है मुझे बिना संगीत सुने ही वापस महल में जाना होगा।”

तानसेन ने कहा- “मेरे मालिक… गुरुजी केवल तभी गाते हैं जब उन्हें लगता है कि सही समय है। हमें धैर्य रखना चाहिए।” फिर एक सुबह अकबर को एक बहुत ही मुधर स्वर ने नींद से जगा दिया। स्वामी हरिदास गाना गा रहे थे। उनकी आवाज इतनी गहरी और मीठी थी कि सम्राट पूरी तरह मंत्रमुग्ध हो गये थे।

उनहोने तानसेन से कहा, “तुम सही थे। वास्तव में स्वामी हरिदास तुमसे बेहतर हैं।” अकबर ने अब वापस महल लौटने का निश्चय किया। रास्ते में उन्होंने बीरबल से कहा, “बीरबल, तानसेन का संगीत अपने गुरु के जैसा अच्छा क्यों नहीं है?”

बीरबल बोला, “जहांपनाह! क्योंकि तानसेन आपको खुश करने के लिए गाता है और स्वामी हरिदास भगवान को खुश करने के लिए गाते हैं।”

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