कछुए का घर । दुश्मन की मौत । Hindi Story With Moral

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Hindi Story With Moral
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1.कछुए का घर

एक बार स्वर्ग से पक्षीराज गरुड धरती पर पधारे। सभी पशु-पक्षी उनसे मिलने के लिए पहुँचे, किंतु कछुआ अपने घर से नहीं निकला। तब गरुडराज स्वयं कुए के पास गए और उससे पूछा, “सभी पशु-पक्षी मुझसे मिलने केलिए आए, लेकिन तुम नहीं आए। तूम आराम से अपने घर मे ही बैठे हो। क्या तुमने मुझसे मिलना जरूरी नहीं समझा ? “Hindi Story With Moral

कछुआ बोला, ‘गरुड़राज । मेरी इच्छा तो बहुत थी कि आपके दर्शन करू, पर मुझे अपने घर से बहुत लगाव है, इसीलिए मैं अपना घर छोड़कर कहीं नहीं जाता।

कछुए की बात सुनकर गरुड़राज को बहुत क्रोध आया और उन्होंने कछुए को शाप दिया, ” तुम हमेशा अपने घर को अपनी पीठ पर लादे फिरोगे।” बस तभी से कछुआ अपने घर को खोल के रूप में अपनी पीठ पर लादे घूम रहा है।

शिक्षा : किसी भी वस्तु से जरूरत से ज्यादा लगाव नहीं रखना चाहिए।

2.दुश्मन की मौत

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एक गाँव में रहने वाले दो व्यक्ति परस्पर कट्टर दुश्मन थे और एक-दूसरे से बहुत नफरत करते थे। उनके घर पास-पास ही थे। एक बार ऐसा संयोग बना कि उन दोनों को एक-साथ यात्रा करनी पड़ी। समुद्र पार करने के लिए दोनों ने एक नाव किराये पर ली। एक व्यक्ति एक कोने पर और दूसरा दूसरे कोने पर जा बैठा। दोनों एक-दूसरे से मुँह फैरकर यात्रा का आनंद ले रहे थे।

जैसे ही उनकी नाव समुद्र के बीचोंबीच पहुँची, समुद्र में भयंकर तूफान आगया। देखतें ही देखते नाव बुरी तरह डगमगाने लगी।
जो व्यक्ति नाव में आगे की ओर बैठा था, उसने मल्लाह से पूछा, ” मल्लाह जी। बताइए तो नाव का कौन-सा हिस्सा पहले डूबेगा?’”

मल्लाह कुछ देर चुप रहने के बाद बोला, ‘’पिछला हिस्सा पहले डूबेगा।” यह सुनकर आगे बैठा व्यक्ति गहरी साँस भरकर बोला, “चलो, मरने से पहले अपने दुश्मन को मरता हुआ देखने का मौका तो मिलेगा।”

शिक्षा : किसी से बैर रखना अच्छा नहीं होता।

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