चतुर व्यापारी । Chatur Vyapari Tenali Raman

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Chatur Vyapari Tenali Raman
Chatur Vyapari Tenali Raman

Chatur Vyapari Tenali Raman

Chatur Vyapari Tenali Raman :-नमस्कार दोस्तों आज में आप लोगों केलिए तेनाली रमन की एक कहानी लेके आया हूँ। ये कहानी तेनाली रमन की दसवा कहानी है। उम्मीद है आप लोगों को पसंद आएगा। अगर अच्छा लगे तो निचे कमेंट करके जरूर बताना।

चतुर व्यापारी

राजा कृष्णदेव राय को तेनालीराम से पहेलियां पूछने में बहुत आनन्द आता था। एक दिन राजा ने तेनालीराम से पूछा, “तेनाली, किस जाति के लोग सबसे चतुर होते हैं और कौन सबसे मूर्ख?”

तेनालीराम पलभर के लिए सोचकर बोला, “महाराज, व्यापारी वर्ग सबसे चतुर होता है और ब्राह्मण वर्ग सबसे मूर्ख।”

राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ। ब्राह्मण तो सबसे अधिक पढ़े-लिखे और बुद्धिमान होते हैं, फिर भला वे सबसे मूर्ख कैसे हो सकते हैं? उन्होंने कहा, “क्या तुम इसे साबित कर सकते हो?”

तेनालीराम ने कहा कि वह इस बात को साबित कर सकता है। उसने राजपुरोहित को बुलवाया और कहा, “बुद्धिमान व्यक्ति, राजा की इच्छा है कि आप अपनी चोटी मुंडवा दें।”

तेनालीराम की बात सुनकर राजपुरोहित सकते में आ गया। उसने कहा, “चोटी तो हिन्दुओं का गर्व होता है। मैंने वर्षों से इसे संभालकर रखा है। इस पर मुझे गर्व है। फिर भी यदि आपकी इच्छा है तो मैं इसे मुंडवा तो लूंगा, पर इसके बदले में मुझे क्या मिलेगा?”

राजा ने कहा, “जितना चाहो उतना धन दूंगा।” तब राजपुरोहित ने पांच स्वर्ण मुद्राओं के बदले अपनी चोटी मुंडवा ली और दरबार से चले गए।

तेनालीराम ने अब शहर के सबसे अमीर व्यापारी को बुलवाया। उसे जब राजा की इच्छा बताई तो वह बोला “मैं अपनी चोटी तो मुंडवा लूंगा, पर मैं ठहरा गरीब आदमी।

Tenali Raman Stories in Hindi

जब मेरे भाई की शादी हुई तो अपनी चोटी के लिए मैंने पांच हजार स्वर्ण मुद्राएं खर्च की थी। जब मेरी पुत्री का विवाह हुआ तो मुझे दस हजार स्वर्ण मुद्राएं देनी पड़ीं। अपनी इस चोटी को बचाना मुझे बहुत मंहगा पड़ा है।”

तब राजा ने कहा, “तुम अपनी चोटी मुंडवा लो, तुम्हारा सारा घाटा पूरा कर दिया जाएगा।”

अमीर व्यापारी को पन्द्रह हजार स्वर्ण मुद्राएं दे दी गईं। नाई जब उसकी चोटी काटने के लिए बढ़ा, तो व्यापारी ने कहा, “देखो भाई, अब यह चोटी मेरी नहीं है। यह राजा की है। बहुत सावधानी से मूंडना। मूंडते समय यह जरूर याद रखना कि यह राजा की चोटी है।”

राजा कृष्णदेव यह सुनकर आगबबूला हो गए और बोले, “तुम्हारी यह कहने की हिम्मत कैसे हुई? क्या मैं पागल हो गया हूं, जो मैं अपनी चोटी मुंडवाऊंगा?” राजा ने सिपाहियों को व्यापारी को बाहर निकालने का आदेश दे दिया।

तेनालीराम मुस्कराया। राजा का क्रोध शांत होने पर उसने कहा, “महाराज, क्या आपने देखा…..किस तरह व्यापारी ने पन्द्रह हजार स्वर्ण मुद्राएं आपसे ले लीं और अपनी चोटी भी सुरक्षित रख ली, जबकि ब्राह्मण ने चोटी मुंडवा ली और वह भी पांच स्वर्ण मुद्राओं में।” राजा कृष्णदेव राय तेनालीराम के बुद्धिमानी की प्रशंसा किए बिना नहीं रह सके।

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