Chanakya Quotes । चाणक्य जी के अनमोल विचार

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Chanakya Quotes
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30+ Chanakya Quotes in Hindi

Chanakya Quotes :-चाणक्य को भारत के एक महान् राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री के रूप में जाना जाता है। उनके पिता चणक मुनि एक महान् शिक्षक थे। कहा जाता है कि चाणक्य का जन्म तक्षशिला या दक्षिण भारत में 350 ई-पू- के आसपास हुआ था। उनकी मृत्यु का अनुमानित वर्ष 283 ई-पूबताय श गया है।

चाणक्य को विष्णुगुप्त, वात्स्यायन, मल्लनाग, पक्षिलस्वामी। अंगल, द्रमिल और कौटिल्य भी कहा जाता है। कहा जाता है कि पूत के पाँव पालने में ही दिख जाते हैं-यह बात चाणक्य पर शत प्रतिशत सही साबित होती है। जरा इन बातों पर गौर कीजिए।

Motivational Quotes in Hindi by Chanakya

Chanakya Quotes in Hindi

1.जितना धन कमाया जाए, उसका एक सीमित भाग ही खर्च करना चाहिए और शेष भविष्य के लिए संचित करके रखना चाहिए।

2.शक्तिशाली लोगों के लिए कौन सा कार्य कठिन है। व्यापारियों के लिए कौन सी जगह दूर है। विद्वानों के लिए कोई देश विदेश नहीं है मृदुभाशियों को कोई शत्रु नहीं।

3.जीवन में सफलता पाने के लिए जानवरों से भी गुण ग्रहण करने चाहिए और अपने व्यक्तित्व में इन गुणों का समावेश कर लेना चाहिए।

4.इन बातों पर बार बार गौर करें, सही समय, सहीं मित्र, सही ठिकाना, पैसा कमाने के सही साधन, पैसे खर्च करने के सही तरीक्के आपके ऊर्जा स्रोत।

5.एक दोस्त और धोखेबाज व्यक्ति सैंकड़ों चांडाल लोगों के बराबर होता है चांडाल अर्थात ऐसा मनुष्य, जो दुर्गुणों से भरा हो।

6.जब आप सफ़र पर जाते हैं, तो विद्या अर्जन ही आपका मित्र है। घर में पत्नी मित्र है। बीमार होने पर दवा मित्र है। अर्जित पुण्य मृत्यु के बाद एकमात्र मित्र हैं।

7.समद्र में होने वाली वर्षा व्यर्थ है। जिसका पेट भरा हुआ है उसके लिए अन्न व्यर्थ है। पैसे वाले आदमी के लिए भेट वस्तु का कोई अर्थ नहीं। दिन के समय जलता दिया व्यर्थ है।

8.ब्राह्मण अपनी विद्या के बल पर, राजा अपनी सेना के बल पर, धनवान व्यक्ति संपत्ति के कारण और शूद्र सेवा के कारण समाज में स्थान पाते हैं।

Chanakya Niti Quotes

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9.व्यक्ति इन तीन बातों से सदैव संतुष्ट रहे। १.खुंद की पत्नी। २.वह भोजन जो विधाता ने प्रदान किया। ३.उतना धन जितना ईमानदारी से मिला।

10.लेकिन व्यक्ति को इन तीन चीज़ों से कभी संतुष्ट नहीं होना चौहिए। १.अभ्यास २.भगवान के नाम का स्मरण। ३.परोपकार

11.हाथी से हजार गज़ की दूरी रखें। घोड़े से सौ की सींग वाले जानवर से दस की। लेकिन दुष्ट जहाँ हो उस जगह से ही निकल जाएं।

12.अपने व्यवहार में सदा सीधे न रहें। यदि आप वन जाकर देखते हैं, तो पाएंगे कि जो पेड़ सीधे उगे उन्हें काट लिया गया और जो पेड़ आडे टेढ़े हैं वो खड़े हैं।

13.इस पृथ्वी पर काम करना अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि पेट तो कुत्ता भी भर लेता है। ज्ञानी वही है, जो भोजन की चिंता नहीं करता।

14.वही पंडित है और सच्चा ब्राह्मण है, जो पराई स्त्री को मां के समान समझे। दूसरों के धन को मिट्टी के समान समझे और सभी प्राणियों से समानता का व्यवहार करें।

15.जिस व्यक्ति के पास बल है, लेकिन बुद्धि नहीं है, वे अपने से भी कम बलवान व्यक्ति से हार जाता है।

16.बहुत अधिक थक जाने पर भी बोझ ढोते रहना, गर्मी सर्दी का ख्याल ना करना, सदैव संतोष रखना, ये तीन गुण गधे से सीखने चाहिए।

Quotes of Chanakya

Chanakya Quotes
17.शांति के तुल्य कोई तपस्या नहीं है। संतोष के समान कोई सुख नहीं है, लालच से बढ़कर कोई बड़ी बीमारी नहीं है। इनमें ही जीवन की सार्थकता है।

18.जो व्यक्ति जैसा सेवन करता है, वैसे ही उसकी संतान पर प्रभाव होता है। सोना आग खाने से और चमकता है जबकि दीपक अंधेरे का सेवन करता है और कालिख को जन्म देता है।

19.मनुष्य को उस वक्त तक भय से डरना चाहिए जब तक कि भय उससे दूर रहे । लेकिन यदि भय सामने आ ही जाए तो निडर होकर उसका सामना करना चाहिए।

20.पुरुषों में नाई, जानवरों में गीदड़, पक्षियों में कौवा और स्त्रियों में मालिन सबसे ज्यादा अधिक चालाक माने जाते हैं। इनसे पार पाना बेहद कठिन होता है।

21.विदेश में विद्या, मित्र के समान सहयोग देती है। घर में स्त्री मित्र के समान और रोगी के लिए औषधि मित्र के समान है और मृतक के लिए उसका मित्र सिर्फ धर्म ही है।

22.ब्रह्मज्ञानी के लिए स्वर्ग और शूरवीर व्यक्ति के लिए जीवन और जिसने इंद्रियों को वश में कर रखा हो उसके लिए परम सुंदरी, तिनके के बराबर भी मूल्य नहीं रखते।

23.एकाग्र चित्त होकर तप करते हुए वांछित वस्तु को प्राप्त किया जा सकता है। चेतना की शक्ति असीमित है और एकाग्रता और तप से अप्राप्य को भी प्रापय बनाया जा सकता है।

24.धन से धर्म की रक्षा होती है। खानपान और योग से विद्या की रक्षा होती है,शक्ति से राजा की रक्षा होती है और अच्छी स्त्री से घर की रक्षा होती है।

Chanakya Quotes on Love


25.लक्ष्मी चंचल है। यह स्थिर नहीं रहती । इस शरीर में प्राण भी स्थाई नहीं है। इस संसार में केवल और केवल धर्म ही स्थाई है।

26.अभ्यास से विद्या का, सुशीलता से कुल का और गुण व्यवहार से मनुष्यता का ज्ञान होता है तथा आंखों से क्रोध का पता चलता है।

27.जो व्यक्ति लेन-देन के मामले में, अध्ययन अध्यापन में, भोजन ग्रहण करने में और बहस करने में लाज शर्म नहीं करता, वह सुखमय जीवन व्यतीत करता है।

28.पागल व्यक्ति, कुंवारी कन्या, कौढ़ी, गुंडा, चांडाल और कान फटे साधु, इन सब से दूर ही रहना चाहिए क्योंकि इनका सानिध्य बेहद दुखदाई होता है।

29.किसी भी व्यक्ति के खानदान के बारे में, उसके व्यवहार से पता लगता है । देश का पता बोली से लगता है। प्रेम का पता आदर से और शरीर का पता भोजन से लगता है।

30.नदी किनारे के पेड़ कभी भी टूट कर नदी की धारा में बह सकते हैं, और बिना मंत्री का राजा कभी भी अपना राज्य खो सकता है।

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