स्वर्ग की यात्रा । Akbar And Birbal Stories

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Akbar And Birbal Stories
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Akbar And Birbal Stories

Akbar And Birbal Stories :-Hello मित्रों आज में आप लोगों केलिए अकबर बीरबल की एक कहानी लेके आया हूँ। ये अकबर बीरबल की नवा कहानी है। उम्मीद है आप लोगों को पसंद आएगा। अगर अच्छा लगे तो निचे कमेंट करके जरूर बताना।

स्वर्ग की यात्रा

जब से बीरबल बादशाह अकबर को दरबार में शामिल हुआ था, तब से अकबर के दरबार के कुछ मंत्री खुश नहीं थे। अकबर ने बीरबल का पक्ष अधिक लेना शुरू कर दिया था। इस बात ने मंत्रियों को बीरबल से ईर्ष्या करने वाला बना दिया। उन्होंने शाही नाई की मदद लेने का निश्चय किया। नाई एक गरीब व्यक्ति था।

वह मंत्रियों की इस बुरी योजना में शामिल नहीं होना चाहता था किन्तु उनके द्वारा दिए गए सोने के सिक्कों के कारण वह उनका विरोध नहीं कर सका। इसलिए वह मदद के लिए राजी हो गया। एक दिन जब वह अकबर के बाल काट रहा था तो उसने कहा, “जहांपनाह! कल रात मैंने एक सपना देखा।

आपके पिता मेरे सपने में आए और बोले की वह स्वर्ग में आराम से हैं। उन्होंने आपको चिंता न करने को कहा।” अकबर ने जब यह सुना तो वे उदास हो गये। क्योंकि जब उनके पिता मरे थे, तब वे बहुत छोटे थे। वे अपने पिता को बहुत ज्यादा याद करते थे। वह बोले, “मेरे पिता ने और क्या कहा? मुझे सब कुछ बताओ।”

नाई ने कहा, “जहांपनाह! उन्होंने कहा कि वह ठीक हैं, किंतु थोड़ा बहुत ऊब गए हैं। वह बोले, यदि आप बीरबल को वहां भेज देंगे तो वह उन्हें बहुत खुश रखेगा। वह स्वर्ग से बीरबल को देखते हैं और उसकी बुद्धि और हास्य की प्रशंसा करते हैं।” अकबर ने बीरबल से कहा, “प्रिय बीरबल! मैं तुम से बहुत खुश हूं।

किंतु अपने पिता के पास तुम्हें भेजते हुए मुझे बहुत दुख हो रहा है, जो स्वर्ग में खुश नहीं हैं, वे तुम्हें अपने पास बुलाना चाहते हैं। तुम्हें स्वर्ग में जाना होगा और उनका मनोरंजन करना होगा।” बीरबल ने यह सुना, तो वह चौंक गया। बाद में उसे पता चला कि यह मंत्रियों और नाई द्वारा बनाई गई योजना थी।

Akbar And Birbal Stories

उसने अपने घर के बाहर एक कब्र खुदवाई और कब्र के साथ एक सुरंग खोदी, जो उसके शायनकक्ष तक जाती थी। फिर वह अकबर के पास गया और बोला, “मैं स्वर्ग जाने के लिए तैयार हूं। किन्तु हमारे परिवार की परम्परा है कि हमें अपने घर के बाहर दफन किया जाता है। मैंने पहले से ही कब्र की व्यवस्था कर ली है। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि मुझे वहां जिंदा दफन कर दिया जाए।”

अकबर ने बीरबल की इच्छा पूरी की। बीरबल को जिंदा दफन कर दिया गया। बीरबल सुरंग के रास्ते से अपने घर आ गया। तीन सप्ताह बाद वह अकबर के दरबार में गया। हर कोई बीरबल को देख कर हैरान था। अकबर ने कहा, “तुम स्वर्ग से वापस कब आए? मेरे पिताजी कैसे हैं? और तुम इतने भद्दे क्यों दिखा रहे हो?”

बीरबल बोला, “महाराज आपके पिता जी ठीक हैं। उन्होंने आपको अपनी शुभकामनाएं भेजी हैं। किंतु जहांपनाह, स्वर्ग में कोई नाई नहीं है। इस वजह से मैं बहुत भद्दा दिखा रहा हूं। यदि आपकी कृपा हो तो शाही नाई को आपके पिता जी के पास भेजा जाए जिससे उन्हें खुशी मिलेगी।”

सम्राट ने तुरंत आदेश जिया कि नाई को जिंदा दफन करके स्वर्ग भेजा जाए। नाई अकबर के पैरों में गिर गया और क्षमा मांगने लगा। इसके बाद उसने सब कुछ कबूल कर लिया। अकबर ने यह योजना बनाने वाले सभी मंत्रियों को निकाल दिया और नाई को दस कोड़े मारने का दंड दिया।

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