कौओं की गिनती । Akbar And Birbal Ki Kahani

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akbar and birbal ki kahani
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Akbar And Birbal Ki Kahani

Akbar And Birbal Ki Kahani :-दोस्तों आज में आप लोगों केलिए अकबर बीरबल की एक कहानी लेके आया हूँ। ये अकबर बीरबल की तीसरी कहानी है। उम्मीद है आप लोगों को पसंद आएगा। अगर अच्छा लगे तो निचे कमेंट करके जरूर बताना।

कौओं की गिनती

एक बार पड़ोसी राज्य से एक बहुत प्रसिद्ध विद्वान बादशाह अकबर के दरबार में घूमने को आया। वह अकबर के सामने आकार अभिवादन के लिए झुका और कहा, “जहांपनाह ! मैंने बीरबल की बुद्धि के बारे में बहुत सुना है।

दूरदराज क्षेत्रों के लोग अक्सर इनकी बुद्धि की बहुत प्रशंसा करते हैं। महाराज अगर आप की आज्ञा हो तो मैं इसकी प्रतिभा की परीक्षा लेना चाहता हूं।” अकबर ने बीरबल को बुलाया और उसका विद्वान व्यक्ति से परिचय करवाया।

विद्वान ने कहा, “मुझे बताओ की तुम्हारे राज्य में कितने कोवे रहते हैं?” बीरबल ने आराम से प्रश्न सुना और कहा, “मेरे दोस्त मैं निशिचत रूप में कल आपको जवाब दे दूंगा।”

दरबार में हर कोई बीरबल और उस विद्वान के बीच हुई बातचीत से हैंरान था। बादशाह अकबर ने बीरबल को अलग बुलाया और कहा, “यह आदमी मुझे पागल नजर आता है।

इस शहर में कितने कौवे रहते हैं, यह गिनती करना किसी भी व्यक्ति के लिए कैसे संभव है? तुम्हें सही जवाब जानने के लिए कुछ दिन ले लेने चाहिए थे।

Akbar And Birbal Ki Kahani

तुम एक दिन में उन सभी की गिनती करने में सक्षम नहीं हो।” बीरबल मुस्कराया और बोला, “जहांपनाह! यह आदमी मुझसे चुतराई करने की कोशिश कर रहा है। किंतु आप चिंता नहीं करें। इसे इसकी ही दवाई का स्वाद मिलेगा।”

अगले दिन बीरबल दरबार में पहुंचा। विद्वान पहले से ही वहां बैठा हुआ था। विद्वान ने कहा, “क्या तुम्हें जवाब मिल गया?” बीरबल ने कहा, “बेशक, इस शहर में निशिचत ही कौवे रहते हैं।” विद्वान यह जवाब सुनकर बहुत हैरान था।

वह बोला, “आप इतने यकीन से कैसे कह सकते हैं?” बीरबल अकबर की ओर झुका और बोला, “जहांपनाह! मैंनें इस शहर में रहने वाले सभी कौवों की गिनती कर ली है।” विद्वान बोला,”अगर इससे ज्यादा हुए तो?”

बीरबल बोला, “वे दूसरे राज्यों से आए हुए होंगे।” विद्वान फिर बोला, “अगर इससे कम हुए तो?” बीरबल बोला, “वे दूसरे राज्यों में चले गए होंगे।” यदि किसी को भी मेरे जवाब में संदेह है, तो वह अपनी संतुष्टि के लिए गिनती कर सकता है।”

अकबर जोर से हंसा। विद्वान ने जब बीरबल का जवाब सुना, तो उसे अपने आप पर बहुत शर्म आई। वह उसी दिन उस शहर से इस निश्चय के साथ चला गया कि अब से वह किसी को भी चुनौती नहीं देगा।

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